विजय का 'Thalapathy' से 'CM' तक का सफर: कैसे 108 सीटों के संकट को पार कर बहुमत तक पहुंचे विजय? जानें पूरा सियासी गणित
तमिलनाडु में एक ऐसा चमत्कार हुआ है जिसने राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है। केवल दो साल पुरानी पार्टी, तमिलगा वेट्टी कज़गम (TVK), जिसके नेता अभिनेता विजय हैं, ने 59 साल से चले आ रहे DMK और AIADMK के दबदबे को खत्म कर दिया है। हालांकि, जीत के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने का रास्ता इतना आसान नहीं था।
बहुमत का पेच और 108 का आंकड़ा
234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता होती है। चुनाव नतीजों में विजय की पार्टी TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। लेकिन इसमें एक तकनीकी पेंच था:
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विजय की दोहरी जीत: विजय ने दो सीटों (पेरम्बूर और तिरुचिरापल्ली पूर्व) से चुनाव जीता था। नियमानुसार उन्हें एक सीट छोड़नी पड़ी, जिससे TVK के प्रभावी विधायकों की संख्या 107 रह गई।
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बहुमत से दूरी: बहुमत के आंकड़े (अब 233 सदस्यों के सदन में 117) तक पहुंचने के लिए विजय को 10 और विधायकों के समर्थन की जरूरत थी।
कांग्रेस का 'मास्टरस्ट्रोक' और DMK की नाराजगी
सबसे पहले कांग्रेस ने विजय को समर्थन देने का कदम उठाया। DMK के नेतृत्व वाले गठबंधन (SPA) का हिस्सा रही कांग्रेस ने अपने 5 विधायकों के साथ TVK को समर्थन देने का निर्णय लिया।
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शर्त: कांग्रेस ने साफ किया कि वह "सांप्रदायिक ताकतों" (भाजपा) को रोकने के लिए विजय का साथ दे रही है।
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DMK का 'विश्वासघात' का आरोप: इस फैसले से DMK बिफर गई। वरिष्ठ नेता टी.के.एस. इलंगोवन ने इसे एक बड़ा "विश्वासघात" बताया और यहाँ तक कह दिया कि 'INDIA' गठबंधन अब खत्म हो चुका है।
लेफ्ट और VCK ने बनाया 'मैजिक नंबर'
कांग्रेस के बाद भी विजय बहुमत से पीछे थे। अंततः 8 मई की दोपहर को निर्णायक मोड़ आया:
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वामपंथी दल (CPI और CPM): दोनों दलों के 2-2 विधायकों ने भाजपा के प्रभाव को रोकने के उद्देश्य से TVK को समर्थन देने की घोषणा की।
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VCK और IUML: थोल थिरुमावलवन की पार्टी VCK (2 विधायक) और IUML (2 विधायक) ने भी इस गठबंधन को अपना समर्थन दे दिया।
अंतिम समीकरण:
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TVK: 107
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कांग्रेस: 05
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CPI/CPM/VCK/IUML: 08
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कुल योग: 120 विधायक (बहुमत के 117 के आंकड़े से अधिक)
राज्यपाल और शपथ ग्रहण
विजय को राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मिलने के लिए तीन बार जाना पड़ा। अंततः बहुमत का आंकड़ा स्पष्ट होने के बाद राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने का निमंत्रण दिया। तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन का खतरा टल गया है और अब शनिवार को 'थलपति' विजय मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
विशेषज्ञ विश्लेषण
यह घटनाक्रम भारतीय लोकतंत्र में एक बड़े बदलाव का संकेत है, जहाँ एक नवोदित पार्टी ने स्थापित शक्तियों को चुनौती देकर सत्ता हासिल की। हालांकि विजय ने बिना किसी चुनावी गठबंधन के चुनाव लड़ा था, लेकिन सरकार चलाने के लिए उन्हें उन्हीं दलों का सहारा लेना पड़ा जो कभी उनके प्रतिद्वंद्वी (DMK) के साथी थे। यह गठबंधन भविष्य में कितना स्थिर रहेगा, यह तमिलनाडु की राजनीति का अगला बड़ा सवाल है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह लेख हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर आधारित है। सरकार गठन और गठबंधन की शर्तें संबंधित राजनीतिक दलों के आधिकारिक बयानों के अधीन हैं।
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