अमेरिकी कोर्ट का ट्रंप को बड़ा झटका: 10% वैश्विक टैरिफ रद्द; भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर गहराए अनिश्चितता के बादल
अमेरिकी संघीय अदालत के एक हालिया फैसले ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में हलचल मचा दी है। 'यूनाइटेड स्टेट्स कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड' ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 10% के 'एकसमान टैरिफ' (Across-the-board tariffs) को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अमेरिका के साथ किसी भी बड़े व्यापारिक समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले "रुको और देखो" की नीति अपनानी चाहिए।
क्या है कोर्ट का फैसला?
7 मई को दिए गए 2-1 के बहुमत वाले फैसले में कोर्ट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के पास 'ट्रेड एक्ट 1974' की धारा 122 के तहत सभी आयातित वस्तुओं पर 10% शुल्क लगाने का कानूनी अधिकार नहीं था।
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कोर्ट की टिप्पणी: अदालत ने इन शुल्कों को "अमान्य" और "कानून द्वारा अनधिकृत" करार दिया।
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आधार: कोर्ट के अनुसार, सरकार यह साबित करने में विफल रही कि देश में इतना गंभीर 'भुगतान संतुलन घाटा' (Balance-of-payments deficit) है, जिसके लिए ऐसे कड़े कदमों की आवश्यकता हो।
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समय सीमा: 20 फरवरी को लागू किए गए इन टैरिफ को 50 दिनों के भीतर ही कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ा।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
थिंक टैंक GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ नीति में बार-बार हो रहे बदलाव भारत के लिए जोखिम भरे हो सकते हैं।
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अस्थिर नीति: जब ट्रंप काल के टैरिफ को अमेरिकी अदालतें ही बार-बार खारिज कर रही हैं, तो भारत के लिए दीर्घकालिक व्यापारिक प्रतिबद्धताएं (Commitments) करना मुश्किल है।
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एकतरफा समझौता: वर्तमान में अमेरिका अपने मानक टैरिफ को कम करने के लिए तैयार नहीं है, जबकि वह भारत से अधिकांश क्षेत्रों में अपनी ड्यूटी कम करने की अपेक्षा कर रहा है। ऐसे में समझौता भारत के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
वार्ता के बीच 'संवैधानिक अड़चन'
यह फैसला ऐसे समय आया है जब दोनों देश व्यापारिक समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने के करीब थे।
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अमेरिकी उप-विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने हाल ही में कहा था कि दोनों देश समझौते पर हस्ताक्षर करने के "बेहद करीब" हैं।
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लेकिन, फरवरी में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 'रेसिप्रोकल टैरिफ' को रद्द किए जाने और अब धारा 122 के तहत 10% टैरिफ के अवैध होने से पूरा ढांचा ही लड़खड़ा गया है।
आगे का रास्ता: नए जांच घेरे में भारत
विशेषज्ञों का मानना है कि अब ट्रंप प्रशासन सीधे टैरिफ के बजाय 'धारा 301' (Section 301) जैसी लक्षित जांचों का सहारा ले सकता है।
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हाल ही में अमेरिका ने भारत सहित 16 देशों की औद्योगिक नीतियों की जांच शुरू की है।
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इसके अलावा, 'जबरन श्रम' (Forced Labour) से जुड़े आयात की भी जांच की जा रही है, जिसका असर भारतीय निर्यात पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञ विश्लेषण (E-E-A-T)
यह रिपोर्ट अमेरिकी व्यापार कानून और अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों (जैसे अजय श्रीवास्तव और शिशिर प्रियदर्शी) के विश्लेषण पर आधारित है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि अमेरिका के भीतर चल रही कानूनी खींचतान यह संकेत देती है कि वहाँ की व्यापारिक नीतियां वर्तमान में "स्थिर" नहीं हैं। भारत जैसे देश के लिए यह जरूरी है कि वह अपनी बाजार पहुंच (Market Access) देने के बदले ठोस और कानूनी रूप से सुरक्षित रियायतें प्राप्त करे।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट अमेरिकी कोर्ट के हालिया फैसले और व्यापार विशेषज्ञों के बयानों पर आधारित है। व्यापार वार्ता के अंतिम परिणाम दोनों देशों के कूटनीतिक और कानूनी फैसलों पर निर्भर करेंगे।
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