राजस्थान में अपराधियों पर 'स्ट्राइक': 727 पॉइंट्स पर सघन नाकाबंदी; हजारों वाहन जब्त और 150 से अधिक गिरफ्तार
जयपुर | प्रशासनिक डेस्क
राजस्थान में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने और अपराधियों में खौफ पैदा करने के लिए पुलिस मुख्यालय पूरी तरह 'एक्शन मोड' में है। पुलिस महानिदेशक (DGP) श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर प्रदेशभर में दो दिवसीय विशेष नाकाबंदी अभियान चलाया गया。 इस सघन जांच अभियान के दौरान यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों से लेकर अवैध गतिविधियों में शामिल संदिग्धों पर कड़ी कार्रवाई की गई है。
प्रमुख निर्देश: रेंजवार सघन जांच और जवाबदेही
अतिरिक्त महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) श्री वी.के. सिंह ने अभियान की सफलता का विवरण साझा करते हुए बताया कि प्रदेशभर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे:
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व्यापक घेराबंदी: अभियान के तहत कुल 727 नाकाबंदी पॉइंट्स स्थापित किए गए, जहाँ 16,676 दोपहिया और 18,795 चार पहिया वाहनों की सघन तलाशी ली गई。
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रेंजवार फोकस: पहले दिन जयपुर, जोधपुर और बीकानेर रेंज तथा दूसरे दिन उदयपुर, कोटा और भरतपुर रेंज में विशेष अभियान चलाकर अपराधियों की कमर तोड़ी गई。
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कड़ी निगरानी: डीजीपी ने सभी अधिकारियों को संदिग्ध गतिविधियों पर सतर्क निगरानी रखने और अपराधियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं。
सख्त कार्रवाई: यातायात नियमों और अवैध परिवहन पर शिकंजा
अभियान के दौरान मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) के तहत कुल 7,185 कार्यवाहियां की गईं:
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नियमों का उल्लंघन: शराब पीकर वाहन चलाने वाले 262 चालकों, बिना हेलमेट के 1,173 और बिना सीट बेल्ट के 1,213 चालकों के विरुद्ध कार्रवाई की गई。
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ब्लैक फिल्म और नंबर प्लेट: मानकों के विपरीत नंबर प्लेट वाले 857 और ब्लैक फिल्म लगे 739 वाहनों पर शिकंजा कसा गया。
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अवैध सामग्री की जब्ती: कोटा रेंज में अवैध खनन के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए 75 टन काली बजरी और 11 वाहन जब्त किए गए。 इसके अलावा 200 लीटर अवैध देशी शराब और हथियार भी पकड़े गए。
गिरफ्तारी और दर्ज प्रकरण
पुलिस ने इस दो दिवसीय अभियान में गंभीर आपराधिक मामलों का खुलासा करते हुए कुल 150 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है:
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जोधपुर रेंज में सर्वाधिक 1,633 प्रकरण दर्ज हुए, इसके बाद उदयपुर (1,583) और जयपुर (1,094) का स्थान रहा。
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एक्साइज एक्ट में 53 तथा आर्म्स व एनडीपीएस एक्ट में 10-10 एफआईआर दर्ज की गई हैं。
विशेषज्ञ विश्लेषण: सुरक्षा और सुशासन का संतुलन
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के औचक सघन अभियानों से आमजन में सुरक्षा की भावना बढ़ती है और अपराधियों के हौसले पस्त होते हैं। विशेषकर नवगठित जिलों और दूरस्थ क्षेत्रों में पुलिस की मौजूदगी कानून-व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाती है। बजट घोषणाओं के अनुरूप पुलिस के आधुनिकीकरण और इस तरह के 'एक्शन मोड' से राजस्थान में अपराध नियंत्रण की नई दिशा तय होगी।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह लेख राजस्थान पुलिस मुख्यालय और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर तैयार किया गया है。
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