वैश्विक व्यापार रिपोर्ट: अमेरिका का कुल व्यापार घाटा बढ़ा, लेकिन भारत के साथ कम हुई खाई; चीन और वियतनाम के साथ अंतर बरकरार
अमेरिकी जनगणना ब्यूरो (US Census Bureau) और आर्थिक विश्लेषण ब्यूरो द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने में अमेरिका का कुल व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़कर 60.3 बिलियन डॉलर हो गया है। यह फरवरी के संशोधित 57.8 बिलियन डॉलर के मुकाबले 2.5 बिलियन डॉलर की वृद्धि है। हालांकि, भारत के नजरिए से सुखद खबर यह है कि अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा पिछले साल की तुलना में काफी कम हुआ है।
भारत-अमेरिका व्यापार: कम होता फासला
ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में भारत के साथ अमेरिका का वस्तु व्यापार घाटा (Goods Trade Deficit) 3.8 बिलियन डॉलर रहा।
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तुलना: मार्च 2025 में यह घाटा 7.4 बिलियन डॉलर था, यानी एक साल में इसमें भारी कमी आई है।
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निर्यात-आयात: मार्च में भारत को अमेरिकी निर्यात बढ़कर 4.3 बिलियन डॉलर हो गया, जबकि भारत से अमेरिका का आयात लगभग 8.4 बिलियन डॉलर रहा।
यह सुधार ऐसे समय में आया है जब दोनों देश आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain), तकनीकी सहयोग और टैरिफ जैसे मुद्दों पर गहन बातचीत कर रहे हैं।
अमेरिकी व्यापार के प्रमुख आंकड़े
मार्च के दौरान अमेरिकी निर्यात और आयात दोनों में वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन आयात की गति तेज रही:
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निर्यात: 320.9 बिलियन डॉलर (6.2 बिलियन डॉलर की वृद्धि)। इसमें कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का बड़ा हाथ रहा।
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आयात: 381.2 बिलियन डॉलर (8.7 बिलियन डॉलर की वृद्धि)। ऑटोमोटिव उत्पादों, कंप्यूटर एक्सेसरीज और उपभोक्ता वस्तुओं की मांग ने आयात को बढ़ावा दिया।
चीन और अन्य देशों के साथ स्थिति
जहाँ भारत के साथ व्यापार घाटा सुधरा है, वहीं अन्य देशों के साथ अमेरिका की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है:
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चीन: मार्च में अमेरिका का चीन के साथ व्यापार घाटा 14 बिलियन डॉलर रहा।
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वियतनाम और ताइवान: इन देशों के साथ घाटा क्रमशः 19.2 बिलियन डॉलर और 20.6 बिलियन डॉलर के उच्च स्तर पर बना हुआ है।
वार्षिक रुझान में बड़ा सुधार
अगर साल-दर-साल (Year-to-date) की बात करें, तो 2025 की समान अवधि के मुकाबले अमेरिका के कुल वस्तु और सेवा घाटे में 211.2 बिलियन डॉलर (55%) की भारी गिरावट आई है। यह वैश्विक व्यापार संतुलन में एक बड़े बदलाव का संकेत है।
विशेषज्ञ विश्लेषण (E-E-A-T)
यह रिपोर्ट आधिकारिक अमेरिकी सरकारी डेटा पर आधारित है। भारत और अमेरिका के बीच फार्मास्यूटिकल्स, आईटी सेवाओं, ऊर्जा और इंजीनियरिंग सामानों में बढ़ता व्यापार दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को मजबूती दे रहा है। हालांकि, डिजिटल ट्रेड नियमों और मार्केट एक्सेस को लेकर अभी भी कुछ घर्षण बाकी है, जिसे सुलझाने के लिए दोनों सरकारें निरंतर संवाद कर रही हैं।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह लेख आधिकारिक व्यापारिक आंकड़ों और सरकारी रिपोर्टों पर आधारित है। व्यापारिक घाटे और आयात-निर्यात के आंकड़े वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और मुद्रा विनिमय दरों के अनुसार परिवर्तनशील हैं।
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