सलमान खान फायरिंग केस: 'यह अभिनेता की जान लेने की कोशिश थी', कोर्ट में बॉडीगार्ड की गवाही से बढ़ा शिकंजा
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान के आवास 'गैलेक्सी अपार्टमेंट' पर हुई फायरिंग के मामले में एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। मामले की सुनवाई के दौरान सलमान खान के निजी बॉडीगार्ड ने विशेष अदालत के समक्ष अपनी गवाही दर्ज कराई है। बॉडीगार्ड ने स्पष्ट रूप से कहा कि 14 अप्रैल 2024 की सुबह हुई वह गोलीबारी केवल डराने के लिए नहीं, बल्कि अभिनेता की हत्या करने का एक जानलेवा प्रयास था।
गवाही के मुख्य बिंदु: 14 अप्रैल की वह सुबह
विशेष लोक अभियोजक महेश मुले द्वारा प्रस्तुत किए गए पहले गवाह के रूप में बॉडीगार्ड ने अदालत को बताया कि वह 13 अप्रैल की शाम 7 बजे से ड्यूटी पर तैनात थे। उन्होंने याद करते हुए कहा कि 14 अप्रैल की सुबह करीब 4 बजे सुरक्षा टीम को पटाखों जैसी आवाजें सुनाई दीं।
जांच में पता चला कि मोटरसाइकिल पर सवार हमलावरों ने चार से पांच राउंड फायरिंग की थी। बॉडीगार्ड ने अदालत में अभियोजन पक्ष द्वारा दिखाए गए सीसीटीवी फुटेज की पहचान की और पुष्टि की कि उस समय सलमान खान अपने बेडरूम में मौजूद थे। डिफेंस एडवोकेट विरल बाबर द्वारा किए गए क्रॉस-एग्जामिनेशन में बॉडीगार्ड ने बताया कि फायरिंग के वक्त वह सुरक्षा केबिन में थे।
पुलिस सुरक्षाकर्मी का बयान
इस मामले में एक अन्य गवाह, जो कि एक पुलिस सुरक्षाकर्मी हैं, ने भी शनिवार को अपना बयान दर्ज कराया। उन्होंने बताया कि फायरिंग के समय वह लॉबी में थे और उन्होंने घटना को अपनी आंखों से नहीं देखा, लेकिन मौके पर मिले गोलियों के खोखों (shells) से उन्हें हमले की गंभीरता का पता चला।
मामले की पृष्ठभूमि और अब तक की कार्रवाई
14 अप्रैल 2024 को हुई इस घटना की जिम्मेदारी कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली थी। जांच में सामने आया है कि हमले से दो दिन पहले मोहम्मद रफीक सरदार चौधरी ने गैलेक्सी अपार्टमेंट की रेकी की थी और वीडियो अनमोल बिश्नोई को भेजा था।
वर्तमान में इस मामले के मुख्य आरोपी:
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विकी गुप्ता और सागर पाल: जिन्होंने फायरिंग की थी।
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सोनुकumar बिश्नोई, मोहम्मद रफीक और हरपाल सिंह: न्यायिक हिरासत में हैं।
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अनुज कुमार थापन: पुलिस हिरासत के दौरान आत्महत्या कर ली थी।
सलमान खान को बिश्नोई गिरोह से लगातार मिल रही धमकियों के बाद उनकी सुरक्षा को 'Y+' श्रेणी में अपग्रेड कर दिया गया है और मुंबई पुलिस इस मामले की गहनता से पैरवी कर रही है।
निष्कर्ष
कोर्ट में पहले गवाह की यह गवाही अभियोजन पक्ष के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह साबित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है कि हमलावरों का इरादा केवल दहशत फैलाना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हत्या की साजिश को अंजाम देना था।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार लेख उपलब्ध अदालती कार्यवाही की रिपोर्ट्स और मीडिया ब्रीफिंग पर आधारित है। मामला अभी विचाराधीन (Sub-judice) है और अंतिम फैसला माननीय अदालत द्वारा ही लिया जाएगा। हम किसी भी पक्ष की संलिप्तता की पुष्टि नहीं करते हैं।
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