राजस्थान

गोडावण संरक्षण को लेकर सरकार गंभीर, ब्रीडिंग सेंटरों से बढ़ रही दुर्लभ पक्षी की संख्या

By ज्योति सिंह 🕒 21 May 2026 👁️ 8 Views ⏳ 1 Min Read
गोडावण संरक्षण को लेकर सरकार गंभीर, ब्रीडिंग सेंटरों से बढ़ रही दुर्लभ पक्षी की संख्या

Sanjay Sharma ने गुरुवार को जैसलमेर जिले के सम क्षेत्र स्थित गोडावण ब्रीडिंग सेंटर का दौरा कर वहां चल रही संरक्षण और प्रजनन गतिविधियों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से सेंटर में उपलब्ध सुविधाओं, गोडावण संरक्षण की वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजनाओं की जानकारी ली।

वन राज्य मंत्री ने कहा कि Great Indian Bustard यानी गोडावण राजस्थान का राज्य पक्षी है और इसके संरक्षण को लेकर राज्य सरकार पूरी गंभीरता से कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma के नेतृत्व में वन विभाग लगातार संरक्षण प्रयासों को मजबूत कर रहा है।

उन्होंने कहा कि गोडावण ब्रीडिंग सेंटर इस दुर्लभ पक्षी के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन केंद्रों की मदद से गोडावण की संख्या में धीरे-धीरे वृद्धि देखने को मिल रही है और उनकी प्रजनन क्षमता में भी सुधार हुआ है। अधिकारियों को निर्देश देते हुए मंत्री ने कहा कि संरक्षण कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए तथा गोडावण के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए।

उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस दुर्लभ पक्षी को सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। सरकार संरक्षण कार्यक्रमों के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की दिशा में भी निरंतर प्रयास कर रही है।

निरीक्षण के दौरान Chhotu Singh Bhati, समाजसेवी दलपत हिंगड़ा, सवाई सिंह गोगली, डीएफओ बृजमोहन गुप्ता सहित वन विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।


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यह लेख आधिकारिक जानकारी और प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर तैयार किया गया है। पाठकों की सुविधा और बेहतर प्रस्तुति के लिए सामग्री को सरल एवं मानव शैली में पुनर्लेखित किया गया है।

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🏷️ Tags: #Sanjay Sharma
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ज्योति सिंह

ज्योति सिंह एक कुशल पत्रकार, शोध विश्लेषक और प्रमुख डिजिटल समाचार मंच 'मिशन की आवाज़' की सह-संस्थापक हैं। अपने पति भूपेंद्र सिंह सोनवाल (संस्थापक और मुख्य संपादक) के साथ मिलकर काम करते हुए, ज्योति न केवल पर्दे के पीछे एक सहयोगी हैं, बल्कि मीडिया नेटवर्क के विकास की मुख्य सूत्रधार भी हैं। उनकी जीवन कहानी उच्च जोखिम वाली खोजी पत्रकारिता और गहरे पारिवारिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाने की एक प्रेरणादायक मिसाल है, जो यह साबित करती है कि एक साझा दृष्टिकोण स्वतंत्र क्षेत्रीय मीडिया में क्रांति ला सकता है।

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