करौली: जिला कलेक्टर ने राजस्व अधिकारियों की ली क्लास; पत्थरगढ़ी और भूमि विवादों के त्वरित निस्तारण के दिए कड़े निर्देश
करौली के जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा ने सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ एक अहम समीक्षा बैठक की। इस बैठक का मुख्य एजेंडा लंबित राजस्व मामलों का समयबद्ध निस्तारण, बजट घोषणाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और आमजन को राहत पहुँचाना रहा। कलेक्टर ने दोटूक शब्दों में कहा कि जनहित के कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
विवादित प्रकरणों में संवेदनशीलता और पुलिस का सहयोग
बैठक के दौरान जिला कलेक्टर ने पत्थरगढ़ी (सीमांकन) और रास्तों से जुड़े विवादों पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे मामलों को संवेदनशीलता के साथ निपटाया जाए। कलेक्टर गोदारा ने स्पष्ट किया कि:
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जिन मामलों में कानून व्यवस्था (Law and Order) बिगड़ने की आशंका हो, वहाँ राजस्व अधिकारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचकर कार्यवाही करें।
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राजस्व न्यायालयों में चल रहे प्रकरणों की गुणवत्तापूर्ण सुनवाई सुनिश्चित की जाए।
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नोटिस और सम्मन की तामील में देरी न हो, ताकि न्याय प्रक्रिया में तेजी आ सके।
अवैध खनन और अतिक्रमण पर होगा कड़ा प्रहार
जिले में अवैध खनन की शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कलेक्टर ने संबंधित विभागों को संयुक्त अभियान चलाकर सख्त कार्यवाही करने के आदेश दिए। साथ ही, उन्होंने अनुसूचित जाति (SC) और जनजाति (ST) की भूमि पर हुए अतिक्रमणों को प्राथमिकता से हटाने और सरकारी व चारागाह भूमि को कब्जामुक्त करने के निर्देश दिए।
राजस्व कार्यों की विस्तृत समीक्षा
बैठक में राजस्व विभाग के कामकाज से जुड़े दर्जनों बिंदुओं पर गहन चर्चा की गई, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
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भूमि सुधार: नामान्तरकरण (Mutation), खातों का शुद्धिकरण, और आपसी सहमति से खातों का विभाजन।
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आवंटन: भूमिहीन किसानों को भूमि आवंटन और विभिन्न सरकारी विभागों के लिए लंबित भूमि आवंटन के मामलों का निस्तारण।
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राजस्व ग्राम: मजरों और ढाणियों को नवीन राजस्व ग्राम बनाने के प्रस्तावों की समीक्षा।
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राजस्व वसूली: भू-राजस्व, पंजीकरण आय (Registry Income) और अन्य बकाया वसूलियों की प्रगति।
बजट घोषणाओं और जनसुनवाई पर जोर
कलेक्टर ने राज्य सरकार की बजट घोषणाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इन्हें समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने के आदेश दिए। उन्होंने उपखंड अधिकारियों (SDM) और तहसीलदारों को पाबंद किया कि वे नियमित रूप से जनसुनवाई करें। कलेक्टर ने कहा, "अधिकारी जनता के बीच जाएँ और उनकी समस्याओं का समाधान मौके पर ही सुनिश्चित करें, ताकि ग्रामीणों को कलेक्ट्रेट के चक्कर न लगाने पड़ें।"
इस महत्वपूर्ण बैठक में अतिरिक्त जिला कलेक्टर हेमराज परिड़वाल, जिले के समस्त उपखंड अधिकारी (SDM), तहसीलदार और राजस्व विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
प्रमुख निर्देश एक नज़र में:
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समय सीमा: बजट घोषणाओं और लंबित फाइलों को निर्धारित समय में पूरा करना।
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कार्यवाही: अवैध खनन और अतिक्रमण के खिलाफ जीरो टॉलरेंस।
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सटीकता: राजस्व रिकॉर्ड का शुद्धिकरण और तरमीम कार्यों में गुणवत्ता।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार लेख सूचना एवं जनसम्पर्क कार्यालय, करौली द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट और समीक्षा बैठक के विवरणों पर आधारित है। राजस्व संबंधी नियमों या किसी विशेष प्रकरण की जानकारी के लिए संबंधित उपखंड कार्यालय या तहसील कार्यालय से संपर्क करें।
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