करौली: एससी-एसटी एक्ट के मामलों में न्याय की रफ्तार बढ़ाए प्रशासन, जिला कलेक्टर ने दिए लंबित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश
करौली (राजस्थान): अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और पीड़ितों को समय पर न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुक्रवार को जिला कलेक्टरेट में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा की अध्यक्षता में आयोजित इस 'जिला स्तरीय सतर्कता और मॉनिटरिंग समिति' की बैठक में जिले की कानून-व्यवस्था और लंबित प्रकरणों की गहन समीक्षा की गई।
दर्ज प्रकरणों और चार्जशीट की विस्तृत समीक्षा
बैठक के दौरान जिला कलेक्टर ने पुलिस विभाग द्वारा अब तक दर्ज किए गए मामलों, न्यायालय में प्रस्तुत की गई चार्जशीट और थानों द्वारा पोर्टल पर ऑनलाइन अपडेट किए गए प्रकरणों की संख्या का डेटा खंगाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पोर्टल पर डेटा की एंट्री वास्तविक समय (Real-time) में होनी चाहिए ताकि मॉनिटरिंग में पारदर्शिता बनी रहे।
कलेक्टर अक्षय गोदारा ने निर्देशित किया:
"कानून का उद्देश्य पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाना है। पुलिस और संबंधित विभाग समन्वय स्थापित कर लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण करें। जांच प्रक्रिया में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"
पीड़ितों को मुआवजे और भुगतान की स्थिति
समिति ने इस दौरान पीड़ितों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता और अब तक किए गए भुगतानों की वर्तमान स्थिति की भी समीक्षा की। कलेक्टर ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन प्रकरणों में चार्जशीट पेश हो चुकी है, उनमें नियमानुसार सहायता राशि का भुगतान बिना किसी देरी के सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, उन्होंने न्यायालय में लंबित मामलों की पैरवी को लेकर भी फीडबैक लिया।
शीर्ष अधिकारियों की उपस्थिति
बैठक में सुरक्षा और प्रशासनिक तालमेल देखने को मिला। इस दौरान पुलिस अधीक्षक लोकेश सोनवाल ने पुलिस द्वारा की जा रही कार्रवाई और जांच की प्रगति से समिति को अवगत कराया। बैठक में अतिरिक्त जिला कलेक्टर हेमराज परिड़वाल, समाज कल्याण अधिकारी श्रवण कुमार मीणा, और सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय के सहायक निदेशक धर्मेन्द्र कुमार मीना सहित अन्य विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
प्रशासन की इस सक्रियता का उद्देश्य जिले में सामाजिक समरसता बनाए रखना और वंचित वर्गों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार लेख जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय (DIPR), करौली द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट के तथ्यों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जनहित में सूचना प्रसारित करना है। कानूनी प्रक्रियाओं या विशिष्ट प्रकरणों की अधिकृत जानकारी के लिए कृपया जिला न्यायालय, पुलिस विभाग या सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के आधिकारिक दस्तावेजों का संदर्भ लें। लेखक या प्रकाशक किसी भी प्रशासनिक विवरण में बदलाव के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।
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