कुरीतियों के खिलाफ जाटव समाज का कड़ा रुख: 360 गांवों की समिति ने मृत्युभोज और अवैध शराब पर लगाई पूर्ण पाबंदी
हिंडौन सिटी/सिकरौदा | 03 मई, 2026
करौली जिले के हिंडौन क्षेत्र के अंतर्गत सिकरौदा में रविवार को 'जिला जाटव समाज सुधार समिति 360 गांव' की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। समिति के अध्यक्ष हट्टी राम ठेकेदार की अध्यक्षता में आयोजित इस सभा में समाज के उत्थान और व्याप्त कुरीतियों को जड़ से खत्म करने के लिए पांच कड़े नियमों के पालन का संकल्प लिया गया। इस बैठक में हिंडौन तहसील की कार्यकारिणी सहित पूरे सिकरौदा क्षेत्र के प्रबुद्ध जन और सरदारी ने हिस्सा लिया।
कुप्रथाओं पर प्रहार: आर्थिक और सामाजिक सुधार की ओर कदम
बैठक के दौरान 18 जनवरी 2026 को श्री महावीर जी में आयोजित विशाल आम सभा में पारित किए गए प्रस्तावों को धरातल पर उतारने हेतु विस्तार से चर्चा की गई। समिति का मुख्य उद्देश्य समाज को फिजूलखर्ची से बचाकर शैक्षिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
समिति द्वारा लिए गए 5 प्रमुख निर्णय:
- लेन-देन की प्रथा पर रोक: समाज में होने वाली रस्मों जैसे लगन-भात, जामना और गोद भराई में महंगे कपड़े देने की प्रथा को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
- नशा और जुआ मुक्ति: जाटव बस्तियों में अवैध शराब की बिक्री, जुआ और सट्टा पर पूर्ण पाबंदी लगाई गई है। इसे सामाजिक अनुशासन का प्रमुख हिस्सा माना गया है।
- मृत्युभोज का बहिष्कार: शोक की घड़ी में आर्थिक बोझ को कम करने के लिए मृत्युभोज के दौरान कच्चा-पक्का भोजन बनाने पर रोक लगा दी गई है। अब केवल चाय-पानी की साधारण व्यवस्था ही मान्य होगी।
- समदौरा प्रथा पर लगाम: शादी के बाद होने वाली समदौरा प्रथा को बंद करने का निर्णय लिया गया है। इसके स्थान पर केवल श्रद्धा अनुसार उपहार या राशि देने का प्रस्ताव रखा गया है।
- नियम उल्लंघन पर दंड: नियमों की अवहेलना करने वाले व्यक्ति या गांव को सामाजिक और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
जागरूकता और अनुशासन की अपील
समिति के प्रवक्ता रिंकू खेड़ी हैवत ने बताया कि इन नियमों का उद्देश्य समाज में समानता लाना और गरीब परिवारों को कर्ज के दलदल से बाहर निकालना है। समिति ने हिंडौन तहसील की समस्त जनता से अपील की है कि वे इन नियमों को पूरी ईमानदारी से अपनाएं ताकि 360 गांवों की यह समिति प्रदेश में आदर्श प्रस्तुत कर सके।
निष्कर्ष
जाटव समाज द्वारा उठाया गया यह कदम अन्य समाजों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकता है। शिक्षा और आर्थिक सुदृढ़ता के इस दौर में, पुरानी और बोझिल कुरीतियों को त्यागना समाज के भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार लेख 'जिला जाटव समाज सुधार समिति' द्वारा जारी प्रेस नोट और आधिकारिक सूचनाओं के आधार पर तैयार किया गया है। सामाजिक दंड के प्रावधान समाज के आंतरिक नियमों के अधीन हैं। यह जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से साझा की जा रही है।
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