Met Gala 2026: न्यूयॉर्क के रेड कार्पेट पर भारतीय कला का जादू; राजा रवि वर्मा से लेकर अजंता की पेंटिंग्स तक, दिखा 'देसी' हुनर
न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट में आयोजित मेट गाला 2026 इस साल भारतीय कारीगरी और विरासत का वैश्विक गवाह बना। इस वर्ष की थीम 'कॉस्ट्यूम आर्ट' (Costume Art) और ड्रेस कोड 'फैशन इज आर्ट' (Fashion is Art) के तहत भारतीय हस्तियों ने अपनी वेशभूषा के जरिए भारत की सदियों पुरानी कला को दुनिया के सामने पेश किया।
ईशा अंबानी: हीरों से जड़ा 'अजंता' का सफर
ईशा अंबानी ने डिजाइनर गौरव गुप्ता द्वारा तैयार किया गया एक अनूठा साड़ी-नुमा गाउन पहना।
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कारीगरी: इस आउटफिट के ब्लाउज में नीता अंबानी के निजी संग्रह से लिए गए 1,000 हीरे और 800 कीमती पत्थर जड़े थे।
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प्रेरणा: साड़ी के बॉर्डर पर अजंता की गुफाओं के भित्ति चित्रों (Frescoes) से प्रेरित हाथ से की गई पेंटिंग और कढ़ाई थी। इसे बनाने में 40 कारीगरों ने 1,200 घंटे से अधिक का समय लगाया।
करण जौहर: 'राजा रवि वर्मा' की जीवंत पेंटिंग
अपने मेट गाला डेब्यू पर फिल्म निर्माता करण जौहर ने मनीष मल्होत्रा द्वारा डिजाइन किया गया 'फ्रेम इन इटर्निटी' (Framed in Eternity) कोट पहना।
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खासियत: इस विंटेज जैकेट पर महान चित्रकार राजा रवि वर्मा की पेंटिंग्स को हाथ से की गई कढ़ाई और ऑयली फिनिश के जरिए उतारा गया था। इसे 5,600 घंटों की कड़ी मेहनत से 50 से अधिक कारीगरों ने तैयार किया।
सुधा रेड्डी: 125 करोड़ का ऐतिहासिक हार
हैदराबाद की व्यवसायी सुधा रेड्डी ने मनीष मल्होत्रा का रॉयल नेवी ब्लू वेलवेट लहंगा पहना। उनके लुक का मुख्य आकर्षण उनका 15 मिलियन डॉलर (लगभग 125 करोड़ रुपये) का हार था। इसमें तंजानिया का मशहूर 550 कैरेट का 'क्वीन ऑफ मेरेलानी' (तंजानाइट पेंडेंट) लगा था।

भारतीय शिल्प के विभिन्न रंग
इस आयोजन में भारत के अन्य दिग्गजों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई:
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अनन्या बिड़ला: कलाकार सुबोध गुप्ता द्वारा बनाए गए 'स्टेनलेस स्टील मास्क' में नजर आईं, जो उनकी सिग्नेचर स्टाइल को दर्शाता है।
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दीया मेहता जातिया: इन्होंने बंगाल की 'शोला' (Shola) कला को वैश्विक मंच पर पेश किया।
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नताशा पूनावाला: मार्श क्विन द्वारा डिजाइन किए गए एक 'ऑर्किड' (Orchid) प्रेरित स्कल्पचर गाउन में दिखीं।
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जयपुर का राजपरिवार: राजकुमारी गौरवी कुमारी ने अपनी दादी महारानी गायत्री देवी की मूल शिफॉन साड़ी से प्रेरित पोशाक पहनी, जबकि सवाई पद्मनाभ सिंह ने मखमली फूलघर कोट में अपनी रॉयल्टी दिखाई।
भारतीय कारीगरों का सम्मान
इस साल के परिधानों में आरी, दबका, नक्काशी, कलमकारी और जरदोजी जैसे पारंपरिक भारतीय शिल्पों का भरपूर उपयोग किया गया। मनीष मल्होत्रा ने अपने स्वयं के गाउन पर उन कारीगरों के हस्ताक्षर और उनकी 3-डी आकृतियां भी अंकित की थीं, जिन्होंने इसे बनाने में मेहनत की थी।
निष्कर्ष
मेट गाला 2026 केवल ग्लैमर का मंच नहीं रहा, बल्कि इसने यह सिद्ध किया कि भारतीय हस्तशिल्प और पारंपरिक कला किसी भी आधुनिक फैशन तकनीक से कहीं आगे है। यह आयोजन भारत की 'सॉफ्ट पावर' और सांस्कृतिक विरासत के वैश्विक प्रभुत्व को दर्शाता है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह लेख प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) की रिपोर्ट और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। परिधानों की लागत और उनके निर्माण में लगे समय के विवरण संबंधित डिजाइनरों और टीमों के आधिकारिक बयानों पर आधारित हैं।
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