राजस्थान

युवा अध्यक्ष हरिओम ठेकेदार पर हमले के 18 दिन बाद भी पुलिस खाली हाथ; तीन जिलों में उग्र आंदोलन की चेतावनी

By समाचार कक्ष 🕒 09 May 2026 👁️ 35 Views ⏳ 1 Min Read
युवा अध्यक्ष हरिओम ठेकेदार पर हमले के 18 दिन बाद भी पुलिस खाली हाथ; तीन जिलों में उग्र आंदोलन की चेतावनी

करौली / दौसा: जिला जाटव समाज सुधार समिति के युवा अध्यक्ष हरिओम ठेकेदार पर हुए जानलेवा हमले के मामले में नया मोड़ आ गया है। घटना के 18 दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस द्वारा किसी भी आरोपी को गिरफ्तार न किए जाने से समाज के लोगों में गहरा असंतोष व्याप्त है। अब जाटव समाज सुधार समिति और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने संयुक्त रूप से प्रशासन को 7 दिन का अल्टीमेटम दिया है।

क्या है मामला?

बीती 20 अप्रैल 2026 की रात करीब 11:45 बजे, हिण्डौन-महुआ रोड पर अज्ञात हमलावरों ने हरिओम ठेकेदार पर जानलेवा हमला किया था। इस संबंध में महुआ थाने में एफ.आई.आर संख्या 179/2026 दर्ज की गई है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस के पास पर्याप्त समय और सूचना होने के बावजूद अब तक जांच की गति अत्यंत धीमी है।

प्रशासनिक लापरवाही पर उठाए सवाल

समिति प्रवक्ता और आजाद समाज पार्टी के राजस्थान प्रदेश सचिव रिंकू खेड़ी हैवत ने अपने बयान में पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा:

  • "हमने दौसा और करौली के जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षकों को लिखित और मौखिक, दोनों रूप से घटना की गंभीरता बताई है।"

  • "दो जिलों के प्रशासन के बीच समन्वय की कमी या लापरवाही के कारण आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं।"

आंदोलन की चेतावनी और मुख्य मांगें

समिति ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 7 दिनों में कार्रवाई नहीं हुई, तो करौली, सवाई माधोपुर और दौसा जिलों में चक्का जाम और उग्र धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  1. गिरफ्तारी: सभी अज्ञात हमलावरों को 7 दिन के भीतर चिन्हित कर जेल भेजा जाए।

  2. सुरक्षा: पीड़ित परिवार को तत्काल पुलिस प्रोटेक्शन दी जाए।

  3. गश्त: हिण्डौन-महुआ रोड पर रात के समय पुलिस की गश्त बढ़ाई जाए।

  4. लाइसेंस: आत्मरक्षा के लिए पीड़ित को हथियार लाइसेंस की अनुशंसा की जाए।

निष्कर्ष

क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए यह मामला अब कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है। समाज के प्रतिनिधियों ने साफ कर दिया है कि यदि लोकतांत्रिक तरीके से उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो होने वाले किसी भी उग्र आंदोलन की जिम्मेदारी सीधे तौर पर शासन-प्रशासन की होगी।


डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार रिपोर्ट जिला जाटव समाज सुधार समिति द्वारा जारी प्रेस नोट और समाज के प्रतिनिधियों के आधिकारिक बयानों पर आधारित है। इस लेख का उद्देश्य घटना की सूचना प्रसारित करना है। मामले की आधिकारिक पुष्टि पुलिस जांच और अदालती प्रक्रिया के अधीन है।


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