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अमेरिका में गूंजा 'जय भीम': चंद्रशेखर आजाद ने कैलिफ़ोर्निया में बाबा साहेब की 135वीं जयंती पर ली बड़ी शपथ

By समाचार कक्ष 🕒 20 Apr 2026 👁️ 60 Views ⏳ 1 Min Read
अमेरिका में गूंजा 'जय भीम': चंद्रशेखर आजाद ने कैलिफ़ोर्निया में बाबा साहेब की 135वीं जयंती पर ली बड़ी शपथ

विशेष रिपोर्ट: मिशन की आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क

भारतीय राजनीति में शोषितों और वंचितों की मज़बूत आवाज़ बनकर उभरे चंद्रशेखर आजाद इन दिनों संयुक्त राज्य अमेरिका के दौरे पर हैं। इस अंतरराष्ट्रीय दौरे के दौरान उन्होंने कैलिफोर्निया के सैक्रामेंटो में आयोजित एक ऐतिहासिक कार्यक्रम में शिरकत की। अवसर था आधुनिक भारत के निर्माता और संविधान शिल्पी बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 135वीं जयंती का।

रॉयल इवेंट हॉल में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में न केवल भारतीय मूल के नागरिकों ने हिस्सा लिया, बल्कि मानवाधिकारों के समर्थकों की भी भारी भीड़ उमड़ी। चंद्रशेखर आजाद यहाँ मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित थे, जहाँ उन्होंने बाबा साहेब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

वैश्विक मंच पर बाबा साहेब का दर्शन

समारोह को संबोधित करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि बाबा साहेब का दर्शन किसी एक देश या काल के लिए नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के कल्याण का मार्ग है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संबोधित करते हुए ज़ोर दिया कि जिस प्रकार अमेरिका में नागरिक अधिकारों की लड़ाई लड़ी गई, वैसी ही प्रेरणा बाबा साहेब के संघर्ष से पूरी दुनिया को मिलती है।

"यह मेरे लिए केवल गर्व की बात नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने का अवसर है। बाबा साहेब की विचारधारा सीमाओं में नहीं बंधी- वह आज अमेरिका की धरती पर भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी भारत में थी और हमेशा रहेगी।"

मुख्य बिंदु: सैक्रामेंटो कार्यक्रम की झलकियां

  • आयोजक: श्री गुरु रविदास मंदिर सैक्रामेंटो कार्यकारी समिति और साध संगत जी।
  • स्थान: रॉयल इवेंट हॉल, सैक्रामेंटो, कैलिफोर्निया (USA)।
  • उद्देश्य: बाबा साहेब की 135वीं जयंती के माध्यम से सामाजिक न्याय का संदेश फैलाना।
  • शपथ: समाज के अंतिम व्यक्ति को न्याय दिलाने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प।

"जब तक अंतिम व्यक्ति को न्याय न मिले, हम नहीं रुकेंगे"

अपने भाषण के दौरान चंद्रशेखर आजाद काफी भावुक नज़र आए। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र (अमेरिका) और सबसे बड़े लोकतंत्र (भारत) के लोग मिलकर बाबा साहेब को याद कर रहे हैं, तो यह एक नए युग की शुरुआत है। उन्होंने श्री गुरु रविदास मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय साथियों का आभार जताते हुए कहा कि यह पहल ऐतिहासिक है।

उन्होंने मंच से एक बड़ी शपथ लेते हुए कहा, "यह महज़ एक आदरांजलि कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हमारी सामूहिक शपथ है। हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे, जब तक समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को उसका संवैधानिक हक और न्याय न मिल जाए।"

सामाजिक न्याय की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय

जानकारों का मानना है कि चंद्रशेखर आजाद का यह अमेरिका दौरा भारत की बहुजन राजनीति के लिए एक नया मोड़ साबित हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉ. अंबेडकर की विचारधारा का प्रचार-प्रसार यह दर्शाता है कि समानता और बंधुत्व की मांग अब वैश्विक हो चुकी है।

कार्यक्रम के अंत में पूरे हॉल में 'जय भीम', 'जय भारत' और 'जय संविधान' के नारे गूंज उठे। यह कार्यक्रम न केवल श्रद्धांजलि देने का माध्यम बना, बल्कि विदेशों में रह रहे भारतीयों को अपनी जड़ों और अपने महापुरुषों की विचारधारा से जोड़ने का एक मज़बूत सेतु भी साबित हुआ।

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