बालाघाट: महापुरुषों की प्रतिमाएं खंडित करने पर एक सप्ताह बाद भी पुलिस खाली हाथ, कांग्रेस का हल्लाबोल
बालाघाट (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के लांजी थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम कंसुली में सामाजिक समरसता को चोट पहुँचाने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले की प्रतिमाओं को असामाजिक तत्वों द्वारा खंडित किए जाने के एक सप्ताह बाद भी पुलिस की सुस्त कार्रवाई ने क्षेत्र में तनाव और आक्रोश पैदा कर दिया है।
आधी रात की घटना: चश्मदीद बालक ने क्या देखा?
जानकारी के अनुसार, यह शर्मनाक घटना 23 अप्रैल (बुधवार और गुरुवार की मध्यरात्रि) को हुई। ग्राम कंसुली में एक सार्वजनिक चबूतरे पर डॉ. बी.आर. आंबेडकर, महात्मा ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले और महात्मा बुद्ध की प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं।
गांव के एक बालक ने घटना के समय एक अज्ञात शख्स को वहां देखा था। बालक के अनुसार, आरोपी ने सफेद शर्ट और हाफ लोअर पहना था और चेहरे पर सफेद गमछा लपेटा हुआ था। उस अज्ञात व्यक्ति ने बर्बरतापूर्वक डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा को चबूतरे पर ही गिरा दिया, जबकि महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले की प्रतिमाओं को उखाड़कर चबूतरे से दूर फेंक दिया। हालांकि, वहां लगी महात्मा बुद्ध की प्रतिमा सुरक्षित है।
प्रशासनिक विफलता और कांग्रेस का हल्लाबोल
घटना के विरोध में बुधवार को कांग्रेस सेवादल के जिलाध्यक्ष जीतू बर्वे के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर संयुक्त कलेक्टर प्रदीप कौरव को ज्ञापन सौंपा। जीतू बर्वे ने तीखे स्वर में कहा:
"कंसुली की यह घटना केवल तोड़फोड़ नहीं है, बल्कि क्षेत्र में धार्मिक और सामाजिक उन्माद फैलाने की एक सुनियोजित साजिश है। चश्मदीद के सुराग और पुलिस शिकायत के बाद भी एक सप्ताह तक आरोपियों का न पकड़ा जाना प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हम दोषियों के खिलाफ रासुका (NSA) के तहत कार्रवाई की मांग करते हैं।"
विवाद की आशंका और पुलिस की चुप्पी
मामले में शिकायतकर्ता प्रतिमा नागदेवे ने लांजी पुलिस को लिखित शिकायत में कुछ संदिग्धों के नाम भी दिए हैं, जिनका प्रतिमा स्थल को लेकर पहले भी विवाद रहा है। इसके बावजूद, पुलिस अधिकारी वर्तमान में मामले की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
अनुयायियों की चेतावनी: न्याय नहीं तो आंदोलन
लांजी और आसपास के क्षेत्रों में महापुरुषों के अनुयायियों के बीच इस घटना को लेकर गहरा रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही दोषियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल, प्रशासन ने निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं दिखे हैं।
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