मुरैना में दबंगई: दलित मजदूर को अगवा कर बेरहमी से पीटा, जूतों की माला पहनाकर अर्धनग्न घुमाने का आरोप; पुलिस ने शुरू की कार्रवाई
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से सामाजिक सौहार्द को शर्मसार करने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के अंतर्गत दबंगों पर एक दलित ई-रिक्शा चालक को अगवा कर उसके साथ मारपीट करने और उसे अपमानित करने का आरोप लगा है। पीड़ित का दावा है कि उसे न केवल बेरहमी से पीटा गया, बल्कि जूतों की माला पहनाकर अर्धनग्न अवस्था में गांव में घुमाया गया। पुलिस ने इस मामले में नामजद प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
हाइवे से अपहरण और गांव में अमानवीय कृत्य
घटना शनिवार शाम की है, जब जतावर गांव निवासी 40 वर्षीय मोहनलाल (परिवर्तित नाम) सवारी भरकर बस स्टैंड से अपने गांव लौट रहा था। पीड़ित के अनुसार, जब वह नेशनल हाईवे-44 पर सिकरोदा नहर के पास पहुँचा, तभी ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर आए करीब दो दर्जन लोगों ने उसका रास्ता रोक लिया।
आरोप है कि दिलीप गुर्जर, भूरा गुर्जर और सुरेंद्र गुर्जर सहित अन्य लोगों ने उसे जबरन ई-रिक्शा से खींच लिया और लाठी-डंडों से पिटाई शुरू कर दी। दबंग उसे ट्रैक्टर में डालकर जनकपुर ले गए, जहाँ उसके कपड़े उतारकर उसे जूतों की माला पहनाई गई और पूरे गांव में घुमाकर अपमानित किया गया।
पुराने केस में राजीनामे का दबाव या किराया विवाद?
इस घटना के पीछे के कारणों को लेकर दो अलग-अलग पहलू सामने आ रहे हैं:
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पीड़ित का पक्ष: मजदूर का कहना है कि पिछले साल दिवाली पर हुए एक विवाद को लेकर उसने आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। आरोपी उस केस में राजीनामा करने के लिए लगातार दबाव बना रहे थे। समझौता न करने पर उसे डराने और अपमानित करने के लिए इस वारदात को अंजाम दिया गया।
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पुलिस का प्रारंभिक बयान: सिविल लाइन थाना प्रभारी उदयभान सिंह यादव के अनुसार, शुरुआती जांच में यह विवाद ई-रिक्शा के किराए को लेकर प्रतीत हो रहा है। सवारी के पैसे मांगने पर विवाद बढ़ा और मारपीट हुई। हालांकि, पुलिस पुराने विवाद के एंगल से भी जांच कर रही है।
पुलिस की कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रिया
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुँचकर पीड़ित को चंगुल से मुक्त कराया। पुलिस ने भूरा गुर्जर, सुरेंद्र गुर्जर, महेंद्र गुर्जर, दिलीप गुर्जर और करुआ गुर्जर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अब तक एक आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अन्य फरार आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
इस घटना की जानकारी मिलते ही भीम आर्मी, बहुजन समाज पार्टी (BSP) और आजाद समाज पार्टी के पदाधिकारी सिविल लाइन थाने पहुँचे। उन्होंने पुलिस प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
निष्कर्ष
चंबल क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय को लेकर यह घटना गंभीर सवाल खड़े करती है। एक तरफ जहाँ प्रशासन निष्पक्ष जांच का भरोसा दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ दलित संगठनों ने न्याय न मिलने पर सड़कों पर उतरने का ऐलान किया है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार लेख विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस द्वारा दी गई प्रारंभिक जानकारी पर आधारित है। मामले की जांच जारी है और अंतिम तथ्यों की पुष्टि माननीय न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही होगी। हम किसी भी पक्ष के दावों की पूर्ण सत्यता का दावा नहीं करते हैं।
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