कविता

आशाराम मीना की कविता "आम आदमी"

By समाचार कक्ष 🕒 15 Jul 2023 👁️ 102 Views ⏳ 1 Min Read
आशाराम मीना की कविता "आम आदमी"

कल क्यू आज क्यू नही?
फरियाद है क्यू आगाज क्यू नही?

सपनो की दुनिया क्यू बनी है?
डर की छाया क्यू घनी है?

हाथ पसारे काल बुलाए
रह रह कर जिया धनकाए

मर्द है तू नामर्द क्यू बने ?
बेड़ियों में तेरे हाथ क्यू बांधे?

मायूस है क्यू परेशान है क्यू?
तू दबा हुआ अरमान है क्यू ?

उठ कर हाथ बढ़ा कर देख
आंख से आंख मिला कर देख

दुनिया तेरी तेरा जहां है
आ निकल आम ईशान ,
तू भीड़ में छुपा कहा है।।

लेखक: आशाराम मीणा, उप प्रबंधक भारतीय स्टेट बैंक कोटा।

🏷️ Tags: #
Author

समाचार कक्ष

यह मिशन की आवाज का आधिकारिक समाचार कक्ष (News Desk) है। यहाँ हमारी अनुभवी संपादकीय टीम 24/7 सक्रिय रहकर देश-दुनिया की विश्वसनीय, निष्पक्ष और सटीक खबरें आप तक पहुँचाती है।

Comments (0)

Leave a Reply