विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस: 'लोकतंत्र के सजग प्रहरी पर संकट', मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस (World Press Freedom Day) के अवसर पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश में मीडिया की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। खड़गे ने आरोप लगाया कि वर्तमान शासन के तहत भारत में प्रेस की स्वतंत्रता "गंभीर रूप से खतरे में" है और लोकतांत्रिक मूल्यों का लगातार ह्रास हो रहा है।
प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में गिरावट पर जताई चिंता
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए खड़गे ने कहा कि देश को आज एक कड़वी हकीकत का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक (World Press Freedom Index) का हवाला देते हुए दावा किया कि 2014 के बाद से भारत की रैंकिंग में लगातार गिरावट आई है और अब भारत 157वें स्थान पर पहुंच गया है।
"मीडिया सत्ता की नहीं, जनता की आवाज है"
मीडिया की भूमिका को रेखांकित करते हुए खड़गे ने पंडित जवाहरलाल नेहरू के विचारों को उद्धृत किया। उन्होंने लिखा:
"एक स्वतंत्र प्रेस का उद्देश्य सरकार के विमर्श को बढ़ाना या उसकी विफलताओं को छिपाना नहीं है। इसका काम सत्ता से सवाल पूछना, शक्ति की समीक्षा करना और जवाबदेही तय करना है।"
खड़गे ने आगे कहा कि पत्रकार सार्वजनिक सत्य के संरक्षक होते हैं, लेकिन वर्तमान परिदृश्य में यह लोकतांत्रिक गुण कमजोर पड़ता दिख रहा है।
On World Press Freedom Day, the nation must confront a stark and undeniable reality. Since 2014, India’s position in the World Press Freedom Index has steadily declined, falling to 157th place, under the BJP regime.
— Mallikarjun Kharge (@kharge) May 3, 2026
A free press, in its truest sense, does not exist to amplify…
कानूनी प्रावधानों के दुरुपयोग का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाने के लिए कानूनी ढांचे को "हथियार" बनाया जा रहा है। उन्होंने मानहानि कानून, राष्ट्रीय सुरक्षा प्रावधानों और UAPA जैसे कड़े कानूनों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। उनके द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार:
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2014-2020 के बीच: 135 से अधिक पत्रकारों को गिरफ्तार, हिरासत में लिया गया या पूछताछ की गई।
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2014-2023 के बीच: 36 पत्रकारों को जेल भेजा गया।
पत्रकारों के खिलाफ हिंसा पर उठाए सवाल
खड़गे ने भाजपा शासित राज्यों में पत्रकारों की हत्या और उनके खिलाफ बढ़ती हिंसा की घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने राघवेंद्र वाजपेयी (यूपी), मुकेश चंद्राकर (छत्तीसगढ़), राजीव प्रताप सिंह (उत्तराखंड) और धर्मेंद्र सिंह चौहान (हरियाणा) जैसे पत्रकारों का नाम लेते हुए कहा कि ये नाम उन लोगों के लिए एक चेतावनी हैं जो सत्ता के सामने सच बोलने का साहस करते हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार अब डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर भी अपना नियंत्रण सख्त करने की कोशिश कर रही है ताकि स्वतंत्र आवाजों को पूरी तरह खामोश किया जा सके।
INTUC के स्थापना दिवस पर दी बधाई
प्रेस स्वतंत्रता के अलावा, मल्लिकार्जुन खड़गे ने भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC) के 79वें स्थापना दिवस पर भी कार्यकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, गिग वर्कर्स और खेतिहर मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का संकल्प दोहराया।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह लेख राजनीतिक नेताओं द्वारा दिए गए सार्वजनिक बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित एक समाचार रिपोर्ट है। इसमें व्यक्त किए गए विचार राजनेता के निजी और दलीय मत हैं। हमारा उद्देश्य केवल सूचना साझा करना है, किसी भी राजनीतिक विचारधारा का समर्थन करना नहीं।
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