बहुजन शायर सुरेश मेहरा की कविता " राजनीति"
राजनीति
सिर्फ कपड़े साफ होते है दाग बड़े गहरे होते हैं इनके कारदार में
स्थिति वही रहती है बस हालात बदलते हैं मिडिया अखबार में
खुद के बच्चो को धर्म मजहब से दूर रखते हैं नेताओं के बच्चे विदेशो में पढ़ते हैं
आपके बच्चो को धर्म महजब के दंगो में इस्तेमाल किया जाता है आपके जेल में सड़ते है
घाव पर सिर्फ मरहम लगाया जाता है बीमारी की जड़ खत्म नहीं होती है रोग वही रहते हैं
ये सिर्फ पार्टियां तो बदलते हैं नेता तो वही लोग रहते हैं
जब नेता वही लोग रहते हैं तो जख्म वही ,, वही खरोच रहती है
जब नेता ही नही बदलते है तो वही उनकी सोच रहते हैं
जब वही सोच रहती है तो कोर्ट का डंडा और प्रशासन की बंदूक गरीबों पर तनती
सत्ता पूंजीपतियों उच्च जाति के हाथो में होती है
और जब सत्ता पूंजीपतियों उच्च जाति के हाथी में होती हैं तो उनके लिए ही नीतियां बनती है
छोटी छोटी बच्चियों के साथ बलात्कार किए जाते हैं ये न्याय को जाति के तराजू में तोलते है
और बाबा साहेब ने राजनीतिक आरक्षण दिया है नेता तो हमारे एससी एसटी के भी है पर कुर्सी के लालच में कहां बोलते हैं
जो गरीब मजलूमों इंसानियत मानवता का खून पीती है
बस वही राजनीति है।
शायर सुरेश मेहरा

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