संभल: बाबा साहब के गीतों पर पाबंदी की कोशिश? दलित युवती की बारात में मारपीट, पुलिस सुरक्षा में लिए गए फेरे
संभल: लोकतंत्र के स्तंभ और संविधान के रचयिता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने जिस समानता और स्वतंत्रता का सपना देखा था, उसकी राह में कुछ असामाजिक तत्व आज भी रोड़ा बने हुए हैं। उत्तर प्रदेश के संभल जनपद से एक ऐसी घटना सामने आई है, जहाँ एक दलित युवती की शादी की खुशियों को केवल इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि बारात में बाबा साहब के सम्मान में गीत बज रहे थे।
यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था को चुनौती देती है, बल्कि हमारे समाज के भीतर गहरे तक पैठी जातिवादी मानसिकता की ओर भी इशारा करती है।
घटना का विवरण: खुशियों के बीच फैला तनाव
संभल की चंदौसी तहसील के थाना बनियाठेर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अल्लीपुर बुजुर्ग गांव में 29 अप्रैल की शाम एक बारात पहुंची थी। बारात अकबरपुर चितौरी गांव से तेजपाल सिंह की बेटी के लिए आई थी। जैसे ही बारात गांव के पोस्ट ऑफिस मोड़ के पास पहुंची, डीजे पर बज रहे बाबा साहब के गीतों को लेकर कुछ स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई।
आरोप है कि रामबहादुर, अजय, अमन, बबलू और प्रेमपाल नामक व्यक्तियों ने न केवल संगीत बंद करने की धमकी दी, बल्कि विरोध करने पर बारात पक्ष के साथ मारपीट भी की। इस कायराना हमले में दुल्हन पक्ष के 8 से 10 लोग घायल हो गए।
संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन
बाबा साहब भीमराव अंबेडकर किसी एक समाज के नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के गौरव हैं। उनके गीतों या विचारों का प्रचार-प्रसार करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। शादी जैसे निजी और मांगलिक उत्सवों में महापुरुषों के सम्मान में गीत बजाना आस्था और स्वाभिमान का प्रतीक है। इसे रोकने की कोशिश करना सीधे तौर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों का हनन है।
पुलिस की मुस्तैदी और प्रशासनिक कार्रवाई
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस बल तत्काल मौके पर पहुँचा। संभल पुलिस की तत्परता की सराहना की जानी चाहिए कि उन्होंने न केवल स्थिति को संभाला, बल्कि अपनी सुरक्षा में विवाह की रस्में पूरी करवाईं।
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FIR दर्ज: दुल्हन के पिता तेजपाल की शिकायत पर 5 नामजद आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
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जांच जारी: कार्यवाहक थाना प्रभारी रोशन सिंह ने पुष्टि की है कि दोषियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं।
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सुरक्षा में विदाई: पुलिस की मौजूदगी में अगली सुबह बारात को सुरक्षित विदा किया गया।
विशेषज्ञ विश्लेषण: सामाजिक समरसता की आवश्यकता
एक जिम्मेदार विश्लेषण के तौर पर यह कहना अनिवार्य है कि ऐसी घटनाएं समाज में वैमनस्य बढ़ाती हैं। जब भी किसी विशेष विचारधारा या महापुरुष के नाम पर हिंसा होती है, तो यह कानून के शासन (Rule of Law) को कमजोर करती है।
प्रशासन को इस मामले में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी की धार्मिक या सामाजिक आस्था को चोट पहुँचाने का दुस्साहस न करे। पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजना ही पीड़ित परिवार के लिए वास्तविक न्याय होगा।
निष्कर्ष
शादी जैसे पवित्र बंधन में हिंसा का प्रवेश समाज के लिए एक चिंताजनक संकेत है। बाबा साहब के गीतों पर आपत्ति जताना उनके द्वारा दिए गए 'समानता के अधिकार' का विरोध करने जैसा है। संभल की इस घटना में पुलिस ने सुरक्षा देकर अपना कर्तव्य निभाया है, लेकिन अब बारी न्यायपालिका और प्रशासन की है कि वे दोषियों को कड़ी सजा देकर समाज में एक कड़ा संदेश भेजें।
अस्वीकरण: यह लेख उपलब्ध सूचनाओं और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के आधार पर लिखा गया है। हम समाज के सभी वर्गों से शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील करते हैं।
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