रामवीर जाटव हत्याकांड: दोषियों की गिरफ्तारी न होने से जाटव समाज में भारी रोष; पंचायत के नाम पर दबाव बनाने का आरोप
करौली जिले के सूरोठ थाना क्षेत्र में हुए रामवीर जाटव हत्याकांड को लेकर जाटव समाज और ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। हत्याकांड के दो महीने बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी न होने और पीड़ित परिवार पर राजीनामे का दबाव बनाए जाने के विरोध में समाज ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है।
निर्मम हत्या के बाद भी पुलिस के हाथ खाली
प्रवक्ता रिंकू खेड़ी हैवत ने बताया कि 04 मार्च 2026 को 10 से अधिक लोगों ने मिलकर रामवीर जाटव की निर्मम हत्या कर दी थी। इस संबंध में रिपोर्ट संख्या 0073/2026 दर्ज की गई है, लेकिन प्रशासन की ढिलाई के चलते अभी तक हत्यारे कानून की गिरफ्त से बाहर हैं। समाज ने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और कठोरतम कार्रवाई की मांग की है।
राजीनामे के लिए बनाया जा रहा दबाव
जाटव समाज का आरोप है कि 07 मई को दूसरे पक्ष द्वारा बुलाई जा रही 'सर्व समाज पंचायत' के माध्यम से पीड़ित परिवार पर राजीनामा करने का अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। 24 बीसा गांव और 8 गुर्जर गांवों के नाम पर दी जा रही इस कथित चेतावनी से परिवार और ग्रामवासियों में असुरक्षा की भावना है।
प्रशासन से सुरक्षा की गुहार
पंचायत के चलते गांव में तनावपूर्ण और भय का माहौल व्याप्त है। प्रवक्ता रिंकू खेड़ी हैवत ने सूरोठ थाना अधिकारी से मांग की है कि:
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07 मई को अतिरिक्त पुलिस बल: गांव में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाए।
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पुलिस गश्त में वृद्धि: गांव में लगातार हो रही बोर स्टार्टर और केबल चोरी की घटनाओं के साथ-साथ रात में संदिग्ध लोगों की आवाजाही पर रोक लगाने के लिए रात की गश्त बढ़ाई जाए।
आंदोलन की दी चेतावनी
बुधवार को हुई इस बैठक के दौरान लवकुश, लाखनसिंह, सुमरन सिंह, बंटी जाटव, अतरसिंह, वीरसिंह, टीकम, रामरूप, सहित दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे। समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा है कि यदि पुलिस प्रशासन ने शीघ्र ही पीड़ित परिवार को सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित नहीं किया, तो समस्त जाटव समाज बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होगा।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार रिपोर्ट जाटव समाज के प्रवक्ता द्वारा जारी प्रेस नोट और स्थानीय ग्रामीणों के बयानों पर आधारित है। मामले की कानूनी जांच और आरोपियों की संलिप्तता का अंतिम निर्णय पुलिस प्रशासन और माननीय न्यायालय द्वारा किया जाएगा।
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