Rajasthan Birth Certificate Rules: जन्म प्रमाण पत्र में नाम बदलना अब नहीं होगा आसान; राजस्थान सरकार ने लागू किए कड़े नियम
राजस्थान सरकार ने जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) में नाम संशोधन की प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब बच्चे के नाम, मिडिल नेम या सरनेम (उपनाम) में बदलाव करना पहले की तरह सरल नहीं होगा। नए नियमों के अनुसार, अब केवल शपथ पत्र (Affidavit) के आधार पर नाम नहीं बदला जा सकेगा, बल्कि इसके लिए 'गजट नोटिफिकेशन' (राजपत्र में प्रकाशन) अनिवार्य कर दिया गया है।
क्या है नया नियम? (गजट नोटिफिकेशन की अनिवार्यता)
जिला रजिस्ट्रार (जन्म एवं मृत्यु) एवं उप निदेशक, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग, मुकेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार ने रिकॉर्ड की सत्यता बनाए रखने और धोखाधड़ी की संभावनाओं को रोकने के लिए यह कदम उठाया है।
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मिडिल नेम और सरनेम में बदलाव: यदि पहले से जारी प्रमाण पत्र में मिडिल नेम या उपनाम बदलना है, तो राजस्थान के निवासियों के लिए राजस्थान सरकार के राजपत्र और अन्य राज्यों के निवासियों के लिए भारत सरकार के गजट में प्रकाशन के आधार पर ही संशोधन किया जाएगा।
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पूरा नाम बदलना: यदि कोई अपने बच्चे का पूरा नाम (Full Name Change) बदलना चाहता है, तो इसके लिए भी गजट में प्रकाशन कराना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।
सरनेम जोड़ने के लिए मिलेगी थोड़ी राहत
मुकेश कुमार ने स्पष्ट किया कि यदि जन्म प्रमाण पत्र में केवल बच्चे का मूल नाम (First Name) ही अंकित है और माता-पिता उसमें अपना सरनेम जुड़वाना चाहते हैं, तो प्रक्रिया कुछ आसान रहेगी:
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ऐसी स्थिति में माता या पिता के सरनेम से संबंधित दस्तावेजी साक्ष्य देने होंगे।
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साधारण कागज पर एक शपथ पत्र देना होगा।
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दस्तावेजों के आधार पर बच्चे के नाम के आगे माता या पिता का सरनेम जोड़ा जा सकेगा।
पुरानी व्यवस्था हुई समाप्त
पहले नाम में किसी भी तरह के छोटे-मोटे सुधार या उपनाम जोड़ने के लिए केवल एक नोटरी शपथ पत्र पर्याप्त होता था, लेकिन अब इस व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वास्तविक और आवश्यक मामलों में ही परिवर्तन हो सके।
आमजन के लिए अपील
विभाग ने आमजन से अपील की है कि वे जन्म प्रमाण पत्र में किसी भी प्रकार के संशोधन हेतु आवेदन करने से पहले इन नवीन दिशा-निर्देशों को अच्छी तरह समझ लें। गलत जानकारी या पुराने नियमों के आधार पर किए गए आवेदन अब स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
निष्कर्ष
यह बदलाव डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए किया गया है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि जन्म के समय ही नाम की स्पेलिंग और सरनेम को सावधानीपूर्वक दर्ज कराएं ताकि भविष्य में जटिल कानूनी प्रक्रियाओं से बचा जा सके।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार लेख आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा जारी नवीन दिशा-निर्देशों और आधिकारिक प्रेस नोट पर आधारित है। नाम परिवर्तन की कानूनी प्रक्रिया, शुल्क और गजट प्रकाशन की विस्तृत जानकारी के लिए अपने नजदीकी ई-मित्र केंद्र या जिला रजिस्ट्रार कार्यालय से संपर्क करें।
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