पंजाब CM भगवंत मान ने राष्ट्रपति से की मुलाकात; AAP छोड़ने वाले सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर अपनी ही पार्टी के पूर्व सांसदों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। भगवंत मान ने उन 6 राज्यसभा सांसदों की सदस्यता समाप्त करने का आग्रह किया है जिन्होंने हाल ही में आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। मुख्यमंत्री ने इस दल-बदल को "संविधान का मजाक" और "लोकतंत्र की हत्या" करार दिया है।
क्या है पूरा मामला?
बीते 24 अप्रैल को AAP के 7 राज्यसभा सांसदों ने सामूहिक रूप से पाला बदलते हुए भाजपा की सदस्यता ले ली थी। इनमें राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी (सभी पंजाब से) और स्वाति मालीवाल (दिल्ली से) शामिल हैं। यह संख्या राज्यसभा में AAP की कुल ताकत का दो-तिहाई हिस्सा है।
"लोकतंत्र का मर्डर" - भगवंत मान का कड़ा प्रहार
राष्ट्रपति भवन में हुई इस मुलाकात के बाद भगवंत मान ने मीडिया से बात करते हुए कई गंभीर सवाल उठाए:
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नैतिकता का सवाल: मान ने कहा कि सांसदों का एक समूह अलग होकर किसी दूसरी पार्टी में कैसे विलय कर सकता है? यह मनमानी बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
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गणितीय विरोधाभास: उन्होंने सवाल किया कि पंजाब विधानसभा में मात्र 2 विधायकों वाली भाजपा के पास अब पंजाब से 6 राज्यसभा सांसद कैसे हो सकते हैं? यह जनादेश का अपमान है।
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राइट टू रिकॉल की मांग: मुख्यमंत्री ने मांग की कि संविधान में 'रिकॉल' (वापस बुलाने) का प्रावधान होना चाहिए और इन सांसदों को दूसरी पार्टी में जाने से पहले इस्तीफा देना चाहिए था।
विपक्षी खेमे की दलील
दूसरी ओर, राघव चड्ढा और अन्य बागी सांसदों ने भी राष्ट्रपति से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा। उन्होंने AAP सरकार पर "राजनीतिक प्रतिशोध" (Vendetta Politics) का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है। इस पर पलटवार करते हुए मान ने कहा कि भाजपा में जाना किसी के लिए कानूनी कार्रवाई के खिलाफ "सुरक्षा कवच" नहीं बन सकता।
E-E-A-T (विशेषज्ञता और विश्वसनीयता)
यह रिपोर्ट राजनीतिक घटनाक्रमों, आधिकारिक बयानों और संवैधानिक प्रावधानों के विश्लेषण पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक राजनीतिक जानकारी प्रदान करना है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह लेख वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रमों और समाचार एजेंसियों द्वारा प्राप्त जानकारी पर आधारित है। राज्यसभा सदस्यों की सदस्यता और दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) पर अंतिम निर्णय संवैधानिक अधिकारियों और संसद के नियमों के अधीन है।
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