राजस्थान

सावधान! डॉक्टर अपॉइंटमेंट के नाम पर 9 करोड़ की डिजिटल डकैती: APK फाइल से ऐसे हैक हो रहे हैं मोबाइल

By भूपेन्द्र सिंह सोनवाल 🕒 09 May 2026 👁️ 15 Views ⏳ 1 Min Read
सावधान! डॉक्टर अपॉइंटमेंट के नाम पर 9 करोड़ की डिजिटल डकैती: APK फाइल से ऐसे हैक हो रहे हैं मोबाइल

करौली (राजस्थान): डिजिटल इंडिया के इस दौर में साइबर अपराधी अब आपकी सेहत और भरोसे को हथियार बना रहे हैं। राजस्थान की करौली साइबर थाना पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने डॉक्टर का अपॉइंटमेंट बुक करने के नाम पर देश के 24 राज्यों में तबाही मचा रखी थी। 'ऑपरेशन एंटी वायरस 2.0' के तहत हुई इस बड़ी कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि साइबर ठगी का नेटवर्क अब हमारी सोच से कहीं अधिक गहरा और तकनीकी रूप से उन्नत हो चुका है।

'ऑपरेशन एंटी वायरस 2.0': पुलिस को कैसे मिली सफलता?

जिला पुलिस अधीक्षक (SP) लोकेश सोनवाल के निर्देशानुसार, साइबर थाना पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और डेटा माइनिंग के आधार पर सवाई माधोपुर निवासी विष्णु मीना को दबोचा है। पुलिस की जांच में सामने आया कि यह आरोपी महज एक मोहरा भर है, जबकि इसके पीछे एक पूरा सिंडिकेट काम कर रहा है जो राजस्थान से लेकर दक्षिण भारत तक फैला हुआ है।

ठगी की कार्यप्रणाली (Modus Operandi): एक सोची-समझी साजिश

इस गिरोह की ठगी का तरीका इतना शातिर है कि एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी इसका शिकार हो सकता है। पुलिस जांच के अनुसार, ठगी के चरण कुछ इस प्रकार थे:

  1. सर्च इंजन मैनिपुलेशन: अपराधियों ने गूगल मैप्स और सर्च इंजन पर नामी अस्पतालों और विशेषज्ञों के प्रोफाइल में अपने फर्जी मोबाइल नंबर फीड कर दिए।

  2. विश्वास जीतना: जब पीड़ित इलाज के लिए फोन करता, तो आरोपी बहुत ही पेशेवर तरीके से बात कर डॉक्टर की उपलब्धता और फीस की जानकारी देते थे।

  3. APK फाइल का घातक हमला: बुकिंग के नाम पर ठगों ने पीड़ित को 'TOKEN BOOK.APK' नाम की फाइल भेजी। जैसे ही पीड़ित ने इस फाइल को डाउनलोड किया, फोन का पूरा कंट्रोल (Remote Access) ठगों के पास चला गया।

  4. बिना ओटीपी के सफाई: इस फाइल के जरिए ठगों ने स्क्रीन मिररिंग और एसएमएस फॉरवर्डिंग जैसे एक्सेस हासिल कर लिए। इसके बाद पीड़ित के खाते से 3.16 लाख रुपये निकाल लिए गए, और पीड़ित को भनक तक नहीं लगी।

आंकड़ों में अपराध: अरबों का काला साम्राज्य

राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (1930) से प्राप्त डेटा ने जांच अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए हैं।

  • 24 राज्यों का कनेक्शन: इस गिरोह के खिलाफ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और दिल्ली सहित 24 राज्यों में शिकायतें दर्ज हैं।

  • 520 से अधिक मामले: अकेले एक बैंक खाते से 520 साइबर अपराधों के तार जुड़े मिले हैं।

  • 9.18 करोड़ का ट्रांजेक्शन: केवल राजस्थान के पीड़ितों से इस खाते में 9 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जमा हुई है। पुलिस को आशंका है कि पूरे नेटवर्क का कुल फ्रॉड अरबों रुपये में हो सकता है।

फर्जी फर्म और मनी लॉन्ड्रिंग का खेल

ठगी की रकम को वैध दिखाने के लिए आरोपियों ने 'एके फैशन एंड गारमेंट' (चूरू) के नाम से एक शेल कंपनी (Shell Company) बनाई थी। इसी फर्म के करंट अकाउंट का इस्तेमाल 'मनी म्यूल' के तौर पर किया गया। ठगी का पैसा आते ही उसे तुरंत अन्य छोटे-छोटे खातों और डिजिटल वॉलेट्स में ट्रांसफर कर दिया जाता था ताकि पुलिस फंड को फ्रीज न कर सके।

विशेषज्ञ सलाह: डिजिटल सुरक्षा के 4 सुनहरे नियम

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के हमलों से बचने के लिए सतर्कता ही एकमात्र बचाव है:

  • गूगल नंबरों पर संदेह करें: गूगल सर्च पर मिलने वाले नंबर अक्सर यूजर-जेनरेटेड होते हैं। हमेशा अस्पताल की आधिकारिक वेबसाइट (जैसे .edu, .org, या आधिकारिक सरकारी पोर्टल) का उपयोग करें।

  • APK डाउनलोड न करें: गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर के बाहर से कोई भी ऐप (APK फाइल) इंस्टॉल न करें। यह आपके फोन के लिए 'डिजिटल जहर' की तरह है।

  • परमिशन मैनेजर चेक करें: यदि कोई ऐप आपसे 'Accessibility' या 'SMS' की अनुमति मांगता है, तो सावधान हो जाएं।

  • गोल्डन आवर का लाभ: साइबर ठगी होने के पहले 1-2 घंटे 'गोल्डन आवर' कहलाते हैं। तुरंत 1930 पर कॉल करें, ताकि आपका पैसा बैंक के स्तर पर ही रोका जा सके।


अस्वीकरण (Disclaimer)

यह रिपोर्ट हालिया पुलिस कार्रवाई और उपलब्ध साइबर अपराध आंकड़ों पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों को जागरूक करना है। किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपनी व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच स्वयं करें। साइबर सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है।


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भूपेन्द्र सिंह सोनवाल

भूपेन्द्र सिंह सोनवाल एक प्रखर डिजिटल पत्रकार और समाचार मीडिया कंपनी 'मिशन की आवाज' के संस्थापक हैं। वे मुख्य रूप से राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों से सामाजिक न्याय, मानवाधिकार, और नीतिगत मामलों पर तीखी और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं। आंकड़ों की तह तक जाना और जमीनी सच को बेबाकी से पेश करना उनकी विशेषता है। तथ्य-आधारित और स्वतंत्र पत्रकारिता के जरिए वे समाज के हर वर्ग तक सही सूचना पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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