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राजस्थान

खाकी पर कलंक: भिवाड़ी में पुलिस की 'थर्ड डिग्री' से दलित नाबालिग वेंटिलेटर पर; न्याय के लिए अस्पताल पहुँचीं पूजा वर्मा

By समाचार कक्ष 🕒 30 Apr 2026 👁️ 13 Views ⏳ 1 Min Read
खाकी पर कलंक: भिवाड़ी में पुलिस की 'थर्ड डिग्री' से दलित नाबालिग वेंटिलेटर पर; न्याय के लिए अस्पताल पहुँचीं पूजा वर्मा

भिवाड़ी (खैरथल-तिजारा): राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्र भिवाड़ी से पुलिसिया बर्बरता की एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। झिवाना निवासी 16 वर्षीय दलित नाबालिग लोकेश कुमार वर्तमान में अस्पताल में वेंटिलेटर पर अपनी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने उसे अवैध रूप से हिरासत में लेकर इतनी बेरहमी से पीटा कि उसकी हालत मरणासन्न हो गई।

क्या है रूह कँपा देने वाली यह घटना?

यह मामला खैरथल-तिजारा जिले के UIT फेस-3 थाना क्षेत्र का है। परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार:

  • अवैध हिरासत: 21 अप्रैल 2026 को पुलिस ने लोकेश को उसके घर से जबरन उठाया था।

  • अमानवीय प्रताड़ना: हिरासत के दौरान उसे बर्बरतापूर्वक पीटा गया और थर्ड डिग्री यातनाएं दी गईं।

  • गंभीर स्थिति: वर्तमान में लोकेश अस्पताल में वेंटिलेटर पर है और उसकी स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है।

पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष पूजा वर्मा ने थामा पीड़ित का हाथ

घटना की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष पूजा वर्मा अस्पताल पहुँचीं। उन्होंने पीड़ित नाबालिग के स्वास्थ्य की जानकारी ली और बिलखते परिजनों को सांत्वना दी। पूजा वर्मा ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए प्रशासन को चेतावनी दी है कि एक दलित नाबालिग के साथ इस तरह का अन्याय किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल: अभी तक FIR नहीं

इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि परिजनों की शिकायत के बावजूद अब तक दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की गई है। यह न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है, बल्कि मामले को दबाने की कोशिशों की ओर भी इशारा करता है।

न्याय के लिए प्रमुख माँगें:

पीड़ित परिवार और समाज ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित माँगें रखी हैं:

  1. तत्काल FIR: दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध बिना देरी किए मामला दर्ज किया जाए।

  2. सख्त धाराएं: मामले में SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कड़ी धाराएं लगाई जाएं।

  3. निलंबन और गिरफ्तारी: प्रताड़ना में शामिल सभी पुलिसकर्मियों को तुरंत निलंबित कर गिरफ्तार किया जाए।

  4. बेहतर इलाज और मुआवजा: पीड़ित को उच्चतम श्रेणी की चिकित्सा सुविधा और उचित सरकारी मुआवजा दिया जाए।

  5. निष्पक्ष जांच: पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।


निष्कर्ष: क्या मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दिलाएंगे न्याय?

जब कानून के रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो समाज में असुरक्षा का माहौल पैदा होना निश्चित है। भिवाड़ी की यह घटना मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार के लिए एक कड़ी परीक्षा है। राजस्थान अब इस बात की प्रतीक्षा कर रहा है कि क्या सत्ता की संवेदनशीलता केवल शब्दों तक सीमित है या लोकेश कुमार को वास्तव में न्याय मिलेगा।


डिस्क्लेमर: यह लेख पीड़ित परिवार के आरोपों और प्राप्त समाचार सूत्रों पर आधारित है। मामले में आधिकारिक पुलिस जांच और स्पष्टीकरण का अभी इंतजार है।

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समाचार कक्ष

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