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मध्य प्रदेश

MP: राजगढ़ में जाति देखकर काटे जा रहे बाल? वाल्मीकि समाज के युवक का गंभीर आरोप, मचा बवाल

By समाचार कक्ष 🕒 01 May 2026 👁️ 57 Views ⏳ 1 Min Read
MP: राजगढ़ में जाति देखकर काटे जा रहे बाल? वाल्मीकि समाज के युवक का गंभीर आरोप, मचा बवाल

राजगढ़ (मध्यप्रदेश): 21वीं सदी के डिजिटल भारत में आज भी जातिगत भेदभाव की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसकी एक शर्मनाक बानगी मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले से सामने आई है। जिले के खुजनेर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बासखेड़ा में एक युवक ने आरोप लगाया है कि उसे केवल उसकी जाति के कारण सैलून (सेन की दुकान) पर सेवाएं देने से मना कर दिया गया।

घटना का विवरण: 'घंटों इंतजार कराया, फिर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया'

पीड़ित विशाल वाल्मीकि के अनुसार, वह बाल कटवाने के लिए गांव की ही एक दुकान पर गया था। विशाल का आरोप है कि वह वहां एक घंटे तक अपनी बारी का इंतजार करता रहा, लेकिन दुकानदार ने उसे नजरअंदाज कर उसके बाद आने वाले अन्य लोगों की कटिंग करना शुरू कर दिया।

जब विशाल ने इस पर आपत्ति जताई और अपना हक मांगा, तो आरोप है कि दुकानदार ने न केवल बाल काटने से मना कर दिया, बल्कि "भंगी" जैसे अपमानजनक जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उसे दुकान से बाहर जाने को कहा। पीड़ित का यह भी आरोप है कि उसे जान से मारने की धमकी दी गई, जिससे वह और उसका परिवार दहशत में है।

भीम आर्मी ने मोर्चा संभाला: प्रशासन की विफलता पर उठाए सवाल

इस घटना के सामने आने के बाद सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश है। भीम आर्मी के नेता सुनील अस्तेय ने इस मामले को प्रमुखता से उठाते हुए प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाए हैं।

सुनील अस्तेय ने सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रशासन को घेरते हुए कहा:

"आज भी गांवों में बाल जाति देखकर काटे जाते हैं। बासखेड़ा में वाल्मीकि समाज के साथ हुआ अपमान संविधान विरोधी कृत्य है। यदि दलित समाज को आज भी अपमानित होना पड़ रहा है, तो यह प्रशासन की विफलता है।"

उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने पीड़ित विशाल से बात की है और भीम आर्मी इस लड़ाई में परिवार के साथ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरोपियों पर तत्काल कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो लोकतांत्रिक तरीके से उग्र आंदोलन किया जाएगा।

कानूनी प्रावधान और प्रशासन की जिम्मेदारी

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता (छुआछूत) का अंत करता है। वहीं, SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत किसी भी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर सार्वजनिक सेवाओं से वंचित करना या जातिसूचक शब्दों से अपमानित करना एक गैर-जमानती अपराध है।

स्थानीय प्रशासन और खुजनेर थाना पुलिस से मांग की जा रही है कि वे मामले की निष्पक्ष जांच करें और समाज में समानता का संदेश देने के लिए दोषियों पर सख्त कार्रवाई करें।


डिस्क्लेमर (Disclaimer):

यह लेख सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी और पीड़ित पक्ष के दावों के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य समाज में घटित घटनाओं की रिपोर्टिंग करना है। हम किसी भी पक्ष की पुष्टि का दावा नहीं करते हैं; मामले की सत्यता की जांच करना पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। हमारा उद्देश्य किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है।


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