AAP के 7 सांसदों के भाजपा में शामिल होने पर घमासान: धर्मेंद्र जाटव ने उठाए सामाजिक न्याय पर सवाल
आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। इस घटनाक्रम पर कांग्रेस के एससी विभाग के राष्ट्रीय समन्वयक और प्रवक्ता प्रभारी धर्मेंद्र कुमार जाटव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे सामाजिक न्याय व प्रतिनिधित्व के सवाल से जोड़ा है।
जाटव का कहना है कि यदि किसी दलित नेता द्वारा ऐसा कदम उठाया जाता, तो उसे अपने ही समाज की कड़ी आलोचना और अस्वीकृति का सामना करना पड़ता। लेकिन जब सवर्ण वर्ग से आने वाले नेता, जिन्हें पारंपरिक रूप से भाजपा का कोर समर्थक माना जाता है, पार्टी बदलते हैं तो उन्हें वैसी प्रतिक्रिया नहीं झेलनी पड़ती। उनका आरोप है कि ऐसे मामलों में सामाजिक स्वीकृति और राजनीतिक रुझान एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।
उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राज्यसभा में भेजे गए सभी 10 सांसद सवर्ण वर्ग से थे, जबकि पार्टी को समर्थन मुख्य रूप से SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक वर्गों से मिला था। जाटव के मुताबिक, इस असंतुलन ने सामाजिक न्याय की भावना को कमजोर किया और अंततः पार्टी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा।
संघ भाजपा विरोधी पार्टियों में हुई टूटन, सवर्ण वर्ग के नेताओं के नेतृत्व में ही हुई है, इसलिए विपक्ष की पार्टियों को इस तथ्य को मद्देनजर रखते हुए ही क्षेत्रीय नेतृत्व तय करने का निर्णय करना चाहिए।
— Dharmendra Kr Jatav (@Dharmendra4_INC) April 25, 2026
क्योंकि जातिय समाज का वर्गीय चरित्र, राजनीतिक निर्णयों को गहरे से प्रभावित करते… pic.twitter.com/WAVCUsmllu
रामलीला मैदान से लेकर बाद के राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए जाटव ने कहा कि जो लोग शुरुआत में आम आदमी पार्टी के साथ दिखे, उनमें से कई कांग्रेस की चुनावी हार के बाद भाजपा में शामिल हो गए थे। उनके अनुसार, यह सिलसिला अब भी जारी है और यह दर्शाता है कि व्यक्ति की सामाजिक पृष्ठभूमि और उसकी “सोशल लोकेशन” राजनीतिक निर्णयों को गहराई से प्रभावित करती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में प्रतिनिधित्व, सामाजिक न्याय और विचारधारा की स्थिरता जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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