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14 अप्रैल 2026 का पंचांग: द्वादशी तिथि, शतभिषा नक्षत्र, मेष संक्रांति, राहुकाल व शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी

By समाचार कक्ष 🕒 14 Apr 2026 👁️ 27 Views ⏳ 1 Min Read
14 अप्रैल 2026 का पंचांग: द्वादशी तिथि, शतभिषा नक्षत्र, मेष संक्रांति, राहुकाल व शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी

14 अप्रैल 2026 का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इस दिन चैत्र माह, शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि, और मेष संक्रांति जैसे प्रमुख योग बन रहे हैं। साथ ही यह दिन कई भारतीय नववर्षों और त्योहारों के कारण विशेष महत्व रखता है।


पंचांग का संक्षिप्त विवरण

  • दिन: मंगलवार
  • तिथि: शुक्ल पक्ष द्वादशी (रात्रि 12:12 तक), इसके बाद त्रयोदशी
  • नक्षत्र: शतभिषा (शाम 4:05 तक), फिर पूर्वभाद्रपदा
  • योग: शुक्ल योग (दोपहर 3:39 तक), फिर ब्रह्म योग
  • करण: कौलव → तैतिल
  • सूर्य राशि: मीन (सुबह तक), फिर मेष में प्रवेश (मेष संक्रांति)
  • चंद्र राशि: कुंभ

सूर्योदय और सूर्यास्त (दिल्ली)

  • सूर्योदय: सुबह 05:57 बजे
  • सूर्यास्त: शाम 06:46 बजे

शुभ मुहूर्त (आज के शुभ समय)

  • ब्रह्म मुहूर्त: 04:34 – 05:22
  • अमृत काल: 09:04 – 10:40
  • अभिजीत मुहूर्त: 12:02 – 12:52
  • विजय मुहूर्त: 02:30 – 03:21

इन समयों में पूजा, विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य किए जा सकते हैं।


अशुभ काल (बचकर रहें)

  • ☠️ राहुकाल: 03:35 – 05:09 (दोपहर बाद)
  • ⛔ यमगंड: 09:19 – 10:53
  • ⚡ गुलिक काल: 12:27 – 02:01
  • ❌ दुर्मुहूर्त: 08:41 – 09:31

इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।


आज के प्रमुख योग और घटनाएं

मेष संक्रांति (बहुत महत्वपूर्ण)

आज सुबह लगभग 09:30 बजे सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करता है। इसे मेष संक्रांति कहा जाता है और यह हिंदू सौर नववर्ष की शुरुआत मानी जाती है।


आज के प्रमुख त्योहार

14 अप्रैल का दिन पूरे भारत में अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है:

  • बैसाखी (पंजाब का नववर्ष)
  • गुड़ी पड़वा / उगादी (महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश)
  • तमिल नववर्ष (पुथंडु)
  • हिंदू नववर्ष (वसंत ऋतु प्रारंभ)
  • बंगाली नववर्ष (पोहेला बैशाख - आसपास के दिनों में)

 यह दिन नए कार्य शुरू करने, पूजा-पाठ और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।


तिथि और नक्षत्र का महत्व

द्वादशी तिथि

धार्मिक दृष्टि से द्वादशी तिथि व्रत, पूजा और भगवान विष्णु की उपासना के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है।

शतभिषा नक्षत्र

यह नक्षत्र चिकित्सा, शोध और मानसिक शक्ति से जुड़ा माना जाता है। इसके बाद आने वाला पूर्वभाद्रपदा आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है।


क्या करें और क्या न करें

        करें:

  • पूजा-पाठ और दान
  • नए कार्यों की शुरुआत
  • शुभ निवेश

      न करें:

  • राहुकाल में नया काम शुरू न करें
  • विवाद और जोखिम वाले निर्णय टालें
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